कल्पना करो: रात के 2 बजे थे। रोहन अपने कमरे में अकेला था। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी… और हर कुछ सेकंड में बिजली चमक रही थी।

By Abhineet Rajput · 2 segments · 1 contributors · 0 likes
A young man, Rohn, is alone in his room during a stormy night, feeling a sense of fear and vulnerability.
stormisolationfeardarknesssurvival

कल्पना करो: रात के 2 बजे थे। रोहन अपने कमरे में अकेला था। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी… और हर कुछ सेकंड में बिजली चमक रही थी।

कल्पना करो: रात के 2 बजे थे। रोहन अपने कमरे में अकेला था। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी… और हर कुछ सेकंड में बिजली चमक रही थी।

अचानक उसका फोन बजा 📱 स्क्रीन पर “Unknown Number” लिखा था। रोहन ने सोचा—इतनी रात को कौन कॉल करेगा? डरते हुए उसने कॉल उठा लिया… “हेलो…?” दूसरी तरफ़ से धीमी आवाज़ आई— “मैं तुम्हें देख रहा हूँ…” रोहन घबरा गया। उसने तुरंत खिड़की की तरफ देखा… लेकिन बाहर कोई नहीं था। उसने कॉल काट दिया।

अचानक उसका फोन बजा 📱
स्क्रीन पर “Unknown Number” लिखा था।
रोहन ने सोचा—इतनी रात को कौन कॉल करेगा?
डरते हुए उसने कॉल उठा लिया…
Continue reading on ImagineIf →