Vivek: कल्पना करो: एक अनोखा प्रयास Apps ko dekha codes से अलंकृत हर एप का था अलग हर Ai ka था अलग कोड apps ne सांचे मे ढाला पर जाने क्या अधूरा सा लगा फिर apps मे अपनी manifest se सुधार करना शुरू करा उनमे भावनाएँ जोड़ी और apps की बागडोर अपने हाथ मे ली परिणाम apps ka growth +friendly भी होने लगे
